पिछले 3 दिनों में पंजाब में अमृतसर और कपूरथला में दो प्रवासी मजदूरों की ग्रंथ साहब की बेअदबी के आरोप में हत्या से एक बार फिर पंजाब में खालिस्तानी कट्टरपंथ की आहट नजर आने लगी है ! इसकी शुरुआत किसान आंदोलन में देखी गई थी जब सिख निहंगों ने एक व्यक्ति की इसी आरोप में हरियाणा के टिकरी बॉर्डर पर हत्या की थी ! कपूरथला में आरोपी व्यक्ति की पुलिस के हाथों से छीन कर सरेआम पुलिस ही के सामने हत्या की गई थी इसी प्रकार टिकरी बॉर्डर पर भी सबके सामने पुलिस की मौजूदगी में हत्या की गई ! 1978 में जरनैलसिंह भिंडरावाले ने निरंकारी धार्मिक सम्मेलन के विरुद्ध विरोध दिखाकर पंजाब में खालिस्तानी आतंकवाद को शुरू किया था! भिंडरावाले ने शुरू में राजनैतिक षड्यंत्र के कारण यह विरोध शुरू किया था जिसको आईएस आने बाद में अपने कब्जे में ले लिया और भारत में आतंकवाद की शुरुआत की ! यह सब पाकिस्तान की साजिश है ! आई एस आई हमारे देश में होने वाले राजनीतिक किया सांप्रदायिक विरोधो में घुसकर देश में इन विरोधो को उग्र रूप देने का काम करती है जैसा कि नागरिक संशोधन कानून और किसान आंदोलन के समय देखने में आया !

क्या कारण है कि पिछले कुछ सालों से देश की सरकार द्वारा उठाए गए सारे कदमों का बहुत कड़ा विरोध, धरनों और प्रदर्शनों के द्वारा किया जाता है और यह धरना प्रदर्शन संगठित तरीके से डेढ़ से 2 साल तक चलते हैं ! पिछले साल दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून के विरुद्ध शाहीन बाग में धरना पूरे 1 साल चला इसके बाद कृषि संशोधन कानून के विरुद्ध किसानों का धरना प्रदर्शन पूरे डेढ़ साल में समाप्त हुआ है !इस प्रकार के लंबे धरने प्रदर्शन भारत में पहले कभी नहीं देखे गए ! अक्सर राजनीतिक मतभेदों के कारण विरोध प्रदर्शन प्होते थे परंतु नागरिकता संशोधन कानून और किसान आंदोलन जैसे धरने प्रदर्शन आजादी के बाद से आज तक नहीं देखे गए थे जिनमें धरना प्रदर्शन करने वालों के लिए रहन-सहन की उत्तम व्यवस्था तथा खाने पीने के लिए अच्छा इंतजाम इस प्रकार किया गया हो ! किसान प्रदर्शन में भाग लेने वाले ट्रैक्टर और ट्रकों को अच्छा भाड़ा तथा इनमें क्षति होने पर पर्याप्त मुआवजे की व्यवस्था भी थी ! इसी प्रकार शाहीन बाग में धरना प्रदर्शन करने वालों को 500रुपए रोजाना और उत्तम खाने की व्यवस्था की जाती थी ! आखिर यह पैसा कहां से आया तो इसका उत्तर है आई एस आई के विदेशों में बैठे हुए एजेंट अपने परिचितों के अकाउंट में समय-समय पर पैसा भेज रहे थे ! जिनसे इन प्रदर्शनों में सारी व्यवस्था की गई थी ! इस सब का तात्पर्य है की आइ एस आई इन धरने प्रदर्शनों के द्वारा हमारे देश में राजनीतिक और सामाजिक असंतोष फैलाकर देश में अस्थिरता के हालात बनाना चाह रही है जिसके द्वारा आई एस आई 1971 में पाकिस्तान के टुकड़े होकर बांग्लादेश के निर्माण का बदला भारत से ले सके ! पूर्वी पाकिस्तान में पश्चिमी पाकिस्तान के शासकों के जुल्मों सितम के कारण व्यापक असंतोष फैला जिसके द्वारा मुक्ति वाहिनी वजूद में आई जिसको मानवीय आधार पर भारतीय सेना ने सहायता की और इस प्रकार बांग्लादेश का निर्माण पाकिस्तानी सरकार और उसकी सेना के जुल्मों सितम के कारण बांग्लादेश का निर्माण हुआ ! यही सब कुछ आईएसआई भारत में करना चाह रही है !
आज के युग में जहां हर क्षेत्र में तकनीकी बदलाव आए हैं वहीं पर युद्ध प्रणाली में भी भारी फेरबदल हुआ है! पुराने समय की परंपरागत रीति से सीमा पर युद्ध के स्थान पर दुश्मन देश के अंदर ही सामाजिक और राजनीतिक मतभेदों को उग्र रूप में प्रोपेगेंडा के द्वारा उठाकर उसे अस्थिर और तरह-तरह के दंगे प्रदर्शन करा कर असंगठित किया जाता है जिनके द्वारा वह देश स्वयं टुकड़े टुकड़े हो जाता है ! इस युद्ध में मीडिया के माध्यम से मनोवैज्ञानिक प्रोपेगेंडा के द्वारा तरह-तरह के सामाजिक और राजनीतिक विषयों को विरोधियों से उठवा कर उन्हें विस्फोट की स्थिति तक ले जाया जाता है जिसमें संबंधित देश की सरकार के द्वारा शक्ति का प्रयोग करना पड़े और इस शक्ति प्रयोग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मीडिया में दिखाकर देश की छवि को खराब करना ! यही कुछ आई एस आई भारत के साथ भी लंबे समय से कर रही है ! 1978 में खालिस्तानी मूवमेंट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठा उठा कर आईएसआई ने इंग्लैंड अमेरिका और पश्चिमी देशों में रहने वाले सिखों को यह विश्वास कराया की पंजाब के सिखो को भारत में धार्मिक स्वतंत्रता नहीं है !इस प्रकार के प्रोपेगेंडा के बाद विदेशों में रहने वाले सिखों ने हर प्रकार से पंजाब में सिख कट्टरपंथ को आर्थिक मदद की और उनकी आवाज को विश्व पटल पर उठाया और यह बढ़ते बढ़ते ऑपरेशन ब्लू स्टार तक पहुंचा जिसमें देश में आंतरिक युद्ध की स्थिति बन गई और भारतीय सेना को अमृतसर में टँको और अन्य प्रकार की शक्ति का प्रयोग अपने देशवासियों के विरुद्ध ही करना पड़ा ! यहां पर पंजाब के निवासियों की उच्च कोटि की राष्ट्रीयता की भावना होने के कारण आई एस आई अपने मिशन में सफल नहीं हो पाई !
यह सर्वविदित है कि पाकिस्तान में 1970 के आम चुनावों के बाद भारी बहुमत से जीते शेख मुजीबुर रहमान को पश्चिमी पाकिस्तान के शासक प्रधानमंत्री के रूप में नहीं देखना चाहते थे और इसमें खासकर वहां की पंजाबी लॉबी इसके लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी ! इसको देखते हुए पूर्व पाकिस्तान में विद्रोह शुरू हो गया जिसको के लिए दबाने के लिए पाकिस्तानी शासकों ने पूर्वी पाकिस्तान में तरह-तरह के अत्याचार और आतंक फैलाने के लिए उनकी महिलाओं का बलात्कार करना शुरू किया ! जिससे तंग आकर पूर्वी पाकिस्तान के करोड़ों शरणार्थियों ने भारत में शरण ली ! इस सब को देखते हुए मानवता के नाते भारत को इसमें दखल देना पड़ा और भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना को हराकर बांग्लादेश का निर्माण किया !आजकल आई एस आई अफगानिस्तान में तालिबानों को शासन में स्थापित करके अपनी पीठ थपथपा रही है परंतु अभी तक विश्व में इस सत्ता परिवर्तन को किसी भी देश ने मान्यता प्रदान नहीं की है !आजादी के बाद से ही सरेआम पाकिस्तानी सेना वहां के बलूचिस्तान में मानव अधिकारों का हनन कर रही है और यहां पर ना कोई विकास और ना किसी प्रकार के जन कल्याण का कार्य सरकार कर रही है जबकि बलूचिस्तान प्राकृतिक संपदा से संपन्न प्रांत है ! इसके निवासी जब इस पिछड़ेपन के विरुद्ध आवाज उठाते हैं तो उनको दबाने के लिए वहां की सरकार और सेना तरह तरह के अत्याचार उन पर करती है | इसी के चलते वहां के एक प्रमुख जन नेता नवाब बुग्ती को सरेआम एक पहाड़ी गुफा से जहां पर वह अपनी जान बचाने के लिए शरण लिए हुए थे वहां से निकाल कर उन्हें सरेआम पाकिस्तानी सेना ने कत्ल किया था इस प्रकार के अनेक उदाहरण है कि किस प्रकार से बलूचिस्तान के लोगों को सेना गायब कर देती है और वहां के प्रमुख नेता जेलों में डाल दिए गए हैं ! इस सब के बावजूद पाकिस्तानी सरकार और सेना बलूचिस्तान में चलने वाले विरोध के लिए भारत की गुप्तचर संस्था रॉ को जिम्मेदार ठहरा रही है और इसके बदले में वह भारत में तरह-तरह की भ्रांतियां फैला कर यहां के निवासियों को सरकार के विरुद्ध उठ खड़े होने के लिए भड़का रही है !
बांग्लादेश के निर्माण और बलूचिस्तान में उठते विरोध और प्रदर्शन के लिए बदला लेने के लिए पाकिस्तान की आईएसआई भारत में मौजूदा सरकार के द्वारा उठाए गए जनकल्याण के कदमों के विरुद्ध तरह-तरह के प्रदर्शन और दंगे करा कर भारत सरकार पर दबाव डालना चाहती है जिससे भारत सरकार देश में प्रगति और जनकल्याण के लिए कोई कदम ना उठाएं ! नागरिकता संशोधन कानून के विरुद्ध उग्र प्रदर्शन करा कर आई एस आई भारत को पूरे दक्षिण एशिया के घुसपैठियों के लिए एक आश्रय स्थल के रूप में बनाना चाहती है जिससे हमारे देश का जनसंख्या अनुपात बिगड़ जाए और यहां पर भविष्य में उसकी पसंद की सरकार बने ! भारत सरकार ने घुसपैठियों की पहचान और मानवता की रक्षा के लिए इस प्रकार के घुसपैठियों को नागरिकता ना देने का प्रावधान किया है और जिन देशों में अल्पसंख्यकों को धार्मिक स्वतंत्रता नहीं है और उनका शोषण किया जाता है उनको भारत में शरण लेने पर नागरिकता प्रदान किए जाने का प्रावधान है जैसा कि विश्व के विकसित देशों में है ! ! नागरिकता संशोधन कानून आई एस आई कि भारत में घुसपैठियों को घुसाने की चालको ना काम करने के लिए ही बनाया गया है ! जिससे भारत केवल भारत वासियों के लिए ही हो ! इस सकारात्मक कदम को भी आईएसआई ने इस प्रकार से मीडिया में दिखाया है जिससे भारत के अल्पसंख्यकों में असंतोष और असुरक्षा की भावना फैल जाए और वह धरना प्रदर्शन के लिए उग्र रूप में सरकार के विरोध में जैसा कि शाहीन बाग में इतने लंबे समय के लिए देखा गया यह आई एस आई का भारत में परोक्ष युद्ध था ! शाहीन बाग के धरने को और भी उम्र बनाने के लिए और विश्व मीडिया का ध्यान इस तरफ खींचने के लिए इसकी समाप्ति दिल्ली में हुए भयंकर सांप्रदायिक दंगों के साथ हुई ! यह दंगे उस समय हुए जब भारत में अमेरिका के राष्ट्रपति दौरा कर रहे थे और पूरे विश्व का मीडिया दिल्ली में एकत्रित था जो इसकी खबरें विश्व में दिखा रहा था ! इसी प्रकार किसान आंदोलन को भी विश्व मीडिया ने पूरे पश्चिमी देशों में दिखाया जहां से बहुत से संगठनों ने भारत सरकार से किसानों की मांगों को मानने के लिए कहां और अपने देश की सरकारों को इतने लंबे आंदोलन के बारे में तरह तरह से बता कर उन्हें भारत की सरकार पर दबाव डालने के लिए बात किया ! इसके साथ साथ आईएसआई के इसारे पर किसान आंदोलन को आई एस आई के विदेशों में बसे हुए एजेंट आर्थिक और प्रोपेगेंडा के रूप में मदद कर रहे थे ! जैसा कि देखने में आया है की पंजाब के 5000 निवासियों के अकाउंट में ऐसा पैसा पहुंचा है ! जिस पर भारत सरकार की जांच एजेंसियों की नजर है ! इस प्रकार के धन से ही शाहीन बाग के धरने प्रदर्शन और किसान आंदोलन में सारे इंतजाम एक संगठित रूप से किए गए जिनमें धन की कमी कहीं पर नजर नहीं आई ! किसान आंदोलन में प्रदर्शनकारियों के लिए वातानुकूलित रहने के स्थान और हर प्रकार के भोजन और शराब की व्यवस्था की गई थी !
देशवासियों को पाकिस्तान की आईएसआई की इन चालों को अच्छी प्रकार समझ कर उसके परोक्ष युद्ध को उसी प्रकार नाकाम करना चाहिए जिस प्रकार भारतीय सेना ने 1947 से लेकर आज तक पाकिस्तान को सभी युद्धों मैं करारी हार दी है ! इस प्रकार देश में अमन चैन रहेगा जिसमें देश की सरकार देश का विकास और जन कल्याण के कार्य कर सकेगी अन्यथा विकास और जनकल्याण पर खर्च होने वाला धन इस प्रकार के धरने प्रदर्शनों के नियंत्रण पर ही खर्च होता रहेगा ! आज पाकिस्तान दिवालियापन के कगार पर केवल इसलिए है कि वहां पर तरह-तरह के हिंसक आतंकी हर जगह तैयार किए जा रहे हैं जिनके कारण आज पाकिस्तान इस स्थिति में आ गया है !
देश में परोक्ष युद्ध के उदाहरणों को पिछले कुछ साल में देखने के बाद भारत की सरकार को ऐसे कदम उठाने चाहिए जिससे आई एस आई का प्रोपेगेंडा देश में ना फैले और वह अपने कुत्सित इरादों में सफल ना हो पाए ! सरकार के इस कदम में देशवासियों को भी पूरा सहयोग देना चाहिए ना कि कुछ राजनीतिक नेताओं के स्वार्थ के कारण पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा को बढ़ावा ना दिया जा सके ! आज के युग में भारत एक महाशक्ति और विकसित देश के रूप में अपनी छवि बना रहा है और यह छवि तब ही अस्तित्व में आएगी जब देशवासी सकारात्मक कदमों के लिए सरकार का और अपना साथ देंगे !