देश के शासन तंत्र के प्रति अविश्वास पैदा करती मुंबई जैसी अपराधिक घटनाएं

05 Apr 2021 15:45:44
प्रजातंत्र की सफलता के लिए परम आवश्यक है कि देश मैं कानून का राज हो और गैरकानूनी कामों को करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शीघ्र अति शीघ्र हो ! इससे जहां देश में शांति और खुशहाली का माहौल पैदा होता है, वहीं पर आर्थिक और सामाजिक विकास भी होता है ! इस प्रकार के वातावरण में देश के नागरिकों को देश की व्यवस्था पर विश्वास पैदा होता है और उनकी राष्ट्रीयता की भावना मजबूत और ऊंची होती है ! इस प्रकार की व्यवस्था के लिए संविधान में किए गए वायदों को शासन तंत्र द्वारा पूरा किया जाना चाहिए ! भारत का संविधान हर नागरिक को देश के कानून की नजर में समानता और समान अवसरों का वायदा करता है, तो क्या मुंबई में हो रहे घटनाक्रम को देखते हुए कानून की नजर में सब समान है ! पिछले फरवरी में विश्व के प्रसिद्ध व्यवसाई और धनाढ्य मुकेश अंबानी के घर के पास विस्फोटकों से लदी एक एसयूवी पाई गई जिसमें मुंबई पुलिस का ही एक कर्मी सचिन बाजे मुख्य आरोपी पाया गया है ! इसके साथ ही सचिन बाजे के द्वारा ही महाराष्ट्र के गृहमंत्री श्री अनिल देशमुख अवैध वसूली करके धन एकत्रित करना चाहते थे ! यह आरोप मुंबई के एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी और भूतपूर्व कमिश्नर परमवीर सिंह ने लगाए हैं ! अभी कुछ समय पहले हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की हत्या हुई ! पूरा देश उस समय भौचक्का रह गया जब मुंबई पुलिस ने पूरे 1 महीने तक इस हत्या को गंभीरता से नहीं लिया और हत्या के तथ्यों को मिटाने में परोक्ष रूप से सहयोग किया ! इस हत्याकांड में सुशांत के परिवारजनों को बिहार पुलिस और देश की सर्वोच्च अदालत उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा ! उसके बाद भी प्रारंभिक सबूत मिट जाने के कारण इस हत्याकांड का खुलासा नहीं हो पाया ! इस प्रकार के अनेकों उदाहरण हमारे देश के विभिन्न हिस्सों में देखने में आते हैं ! जहां पर सत्ता की शह पर तरह तरह के गंभीर अपराध जैसे अवैध शराब, महिला आश्रय गृह में महिलाओं का शारीरिक शोषण इत्यादि होते रहते हैं ! तो क्या इस स्थिति में एक आम नागरिक को कानून समान रूप से लागू होता दिखाई दे रहा है ! यदि कानून अपना काम समानता से करता तो सुशांत सिंह राजपूत के हत्यारे अब तक जेल में होते और बिहार के मुजफ्फरपुर में महिला आश्रय ग्रह में महिलाओं का शारीरिक शोषण कराने वाले आश्रय गृह के संचालक को सजा मिल गई होती ! परंतु यह हमारे देश का दुर्भाग्य है कि देश के ज्यादातर भागों में संगठित अपराध को किसी ना किसी रूप में राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है !
 
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सत्ता प्राप्ति के लिए राजनीतिज्ञों को धन और बाहुबल की जरूरत पड़ती है जिसके लिए वे इन संगठित अपराधों को चलाने वाले अपराधियों का सहारा लेते हैं ! इसके बदले में यह माफिया डॉन तरह तरह के अपराधों को करते हैं !मीडिया के युग में जब कोई बड़ा अपराध प्रकाश में आता है तब देश के टीवी चैनलों और समाचार पत्रों के द्वारा देशवासी अपना मनोरंजन कर लेते हैं और इसके बाद व्यवस्था उसी प्रकार चलती रहती है ! क्योंकि देशवासी जानते हैं कि इन अपराधियों को सत्ता का सहयोग है ! इसलिए वे चुप रहने में ही अपनी भलाई समझते हैं ! सचिन बाजे को 2004 में उसकी अपराधिक प्रवृत्ति के कारण पुलिस सेवा से निष्कासित कर दिया गया था ! उसके बाद बाजे पूरे 15 साल तक शिवसेना के अधिकृत प्रवक्ता के रूप में कार्य करता रहा ! इसके बाद 2019 में शिवसेना के सत्ता में आने के बाद सचिन बाजे को दोबारा मुंबई पुलिस में उसके उसी पद पर नियुक्त किया गया, और उसकी नियुक्ति मुंबई पुलिस की सबसे संवेदनशील ब्रांच क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट में की गई ! जहां पर मुंबई के अंडरवर्ल्ड और अन्य अपराधों की विवेचना के साथ-साथ उनके बारे में पूरी जानकारी रहती है ! भूतपूर्व पुलिस कमिश्नर परमवीर सिंह ने आरोप लगाया है के अनिल देशमुख मुंबई पुलिस से हर महीने 100 करोड़ों रुपए अवैध वसूली के द्वारा मांग रहे थे !यह वसूली देशमुख सचिन बाजे के द्वारा ही कराना चाह रहे थे ! महाराष्ट्र सरकार में अनिल देशमुख की स्थिति को देखते हुए परमवीर सिंह को देश की उच्चतम अदालत मैं गुहार लगानी पड़ी ! उसके बाद उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर महाराष्ट्र के उच्च न्यायालय में उन्होंने अनिल देशमुख के विरुद्ध इस मामले में जांच की मांग की है ! इस आरोप की गंभीरता इस बात से नापी जा सकती है कि प्रदेश का एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी स्वयं इस आरोप को लगा रहा है और इसके लिए वह न्यायालय में सबूत प्रस्तुत कर रहा है ! परंतु क्या अनिल देशमुख के गृह मंत्री रहते हुए कोई भी जांच इस आरोप की सच्चाई तक जा सकती है ! नैतिक और प्रजातांत्रिक मूल्यों के अनुसार अनिल देशमुख को जांच पूरी होने तक अपने पद से हट जाना चाहिए था ! इस प्रकार जांच की सच्चाई पर देशवासियों का विश्वास बढ़ता ! मुंबई की इन घटनाओं से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह अपराध केवल सचिन बाजे द्वारा नहीं किए जा रहे थे बल्कि इनमें सत्ता का हाथ भी था अन्यथा यह इतने बड़े स्तर पर ना किए जाते ! पूरा देश सुशांत सिंह राजपूत के हत्यारों का खुलासा किए जाने का इंतजार करता रहा परंतु आखिर में निराशा ही हाथ लगी ! तो क्या इन स्थितियों में देशवासियों के अंदर देश की कानून व्यवस्था पर गर्व और विश्वास हो सकता है !
 
देश में अंडवर्ल्ड शब्द मुंबई से ही कुख्यात हुआ ! इसका तात्पर्य है संगठित अपराध एक व्यवसाय के रूप में चलाना ! इसके द्वारा अवैध वसूली, तस्करी, जहरीली शराब, सुपारी हत्या तथा वेश्यावृत्ति जैसे अपराध व्यवसाय के रूप में भाड़े के अपराधियों के द्वारा किए जाते हैं ! संगठित अपराध अन्य व्यवसाय की तरह एक निश्चित स्थान पर लगातार चलते रहते हैं, और उस क्षेत्र की पुलिस और शासन तंत्र के अन्य संबंधित विभाग जैसे आबकारी महिला कल्याण इत्यादि को इसकी पूरी जानकारी रहती है और इन्हें इन अपराधों का निश्चित हिस्सा हफ्ता या महीना के रूप में मिलता रहता है ! परोक्ष रूप से विभागों के कर्मी इसमें अपना सहयोग भी देते हैं ! क्योंकि इन संगठित अपराधियों का गठजोड़ सत्ता में बैठे हुए राजनीतिज्ञों के साथ होता है ! मुंबई देश की आर्थिक राजधानी होने के कारण यहां पर देश की ज्यादातर आर्थिक गतिविधियों को संचालित किया जाता है इसके अलावा देश के मनोरंजन का मुख्य साधन फिल्म व्यवसाय भी यहीं पर स्थित है ! इसलिए यहां पर धन वसूली या अन्य अपराधिक गतिविधियों के ज्यादा मौके हैं ! इस कारण से मुंबई में सबसे पहले अंडरवर्ल्ड की स्थापना हुई, जो एक प्रकार से शासन तंत्र के ही समानांतर चलती रहती है ! इसके उदाहरण हैंमुंबई के कुख्यात माफिया डॉन हाजी मस्तान, छोटा राजन, दाऊद इब्राहिम, अरुण गवली इत्यादि द्वारा चलाए जाने वाले माफिया तंत्र जिन का आतंक मुंबई में रहा ! और इनके बाद के माफियाओं का आतंक आज भी देखा जा सकता है ! जिसके कारण एक आम मुंबई वासी डरा हुआ रहता है ! सुशांत सिंह राजपूत हत्या मामले में इसी प्रकार के माफिया तंत्र की तरफ ही जांच की उंगली उठ रही थी ! परंतु मुंबई पुलिस के व्यवहार से यह साफ नजर आ रहा था कि कहीं ना कहीं इस जांच को दबाया जा रहा है ! जिसके कारण सुशांत सिंह के परिवार को बिहार पुलिस का सहारा लेना पड़ा ! और जब बिहार पुलिस को भी मुंबई पुलिस ने सहयोग नहीं किया तब उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में सीबीआई जांच के आदेश दिए ! परंतु इस हत्या के सबूत तब तक मिल चुके थे इसलिए जांच एजेंसियों को हत्या की गुत्थी सुलझाने मैं सफलता नहीं मिल सकी ! पूरा देश इस हत्या की जांच को देखता रहा और आशा करता रहा कि अपराधियों को पकड़ा जाएगा ! परंतु सचिन बाजे जैसे शातिर मुंबई पुलिस कर्मियों के कारण यह जांच निष्फल रही ! इस प्रकार की घटनाओं से एक आम देशवासी इस प्रकार के अपराधिक माफियाओं से स्वयं को असुरक्षित महसूस करता है और इन से दूरी बनाकर रखता है ! इस कारण अदालतों में इनके विरुद्ध सबूत नहीं मिल पाते हैं जिसके कारण ना इन अपराधियों को सजा मिल पाती हैं और ना ही इन अपराधों पर लगाम लगती है ! यही अंडरवर्ल्ड की कार्यप्रणाली है ! मुंबई के अंडरवर्ल्ड की शक्ति को इसी से पहचाना जा सकता है कि दाऊद इब्राहिम को एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था ने उसे विश्व का नंबर दो स्थान का अपराधी घोषित कर दिया है और पाकिस्तान की आईएसआई भारत के विरुद्ध आतंकवाद रूपी परोक्ष युद्ध दाऊद इब्राहिम के सहयोग से ही लड़ रही है !
 

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उपरोक्त माफिया डॉन मुंबई के अलावा देश के अन्य भागों में भी उतने ही सक्रिय हैं ! आजकल उत्तर प्रदेश के कुख्यात अपराधी और माफिया डॉन मुख्तार अंसारी की कारगुजारी यों की चर्चा चारों तरफ हो रही है ! किस प्रकार राजनीतिक रसूख ओं के द्वारा अंसारी ने उत्तर प्रदेश में अपने विरुद्ध चल रहे अपराधिक मुकदमों से बचने के लिए पंजाब की जेलों का सहारा लिया ! आखिर में उच्चतम न्यायालय को इसमें दखल देना पड़ा और अब न्यायालय के आदेश के बाद अंसारी अपने आपराधिक मुकदमों में पेश होगा ! 2004 में अंसारी को सेना का घातक हथियार लाइट मशीन गन कहीं से मिल गई थी ! यह मशीन गन 1 मिनट में 500 ग्राउंड फायर कर सकती है, इससे इसकी मारक क्षमता का अंदाजा लगा सकता है ! इसकी गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के एक जांबाज पुलिस अधिकारी शैलेंद्र सिंह जो उस समय डीएसपी पद पर थे ने अंसारी के ठिकानों पर छापा मारकर इस एलएमजी को बरामद किया था ! मशीन गन जैसे घातक हथियार की बरामदगी के बाद शैलेंद्र सिंह ने अंसारी के विरुद्ध आतंकवाद की धारा लगा दी थी ! जिसको हटाने के लिए उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने शैलेंद्र सिंह पर तरह तरह के दबाव डालने शुरू किए ! इस बात की पुष्टि स्वयं शैलेंद्र सिंह ने एक टेलीविजन चैनल पर की है ! इसके अतिरिक्त इनके परिवार को तरह-तरह से प्रताड़ित किया गया ! इस प्रताड़ना से बचने के लिए इस अफसर ने पुलिस सेवा से ही त्यागपत्र दे दिया था ! इसी प्रकार कानपुर में पूरे देश ने देखा कि किस प्रकार कुख्यात अपराधी विकास दुबे ने पुलिस के 6 कर्मियों की बेरहमी से घात लगाकर हत्या कर दी ! जिनमें एक डीएसपी रैंक का अधिकारी भी था ! विकास दुबे ने उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नगरी कानपुर में आतंक का साम्राज्य स्थापित किया हुआ था ! और वहां पर अवैध वसूली और संपत्तियों पर कब्जा करता था ! उसके रसूख का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2004 में उत्तर प्रदेश के 1 राज्य मंत्री को भरी सभा से भागकर विकास दुबे के गुर्गों से अपनी जान बचाने के लिए पुलिस थाने में शरण लेनी पड़ी ! इसके बावजूद भी इस मंत्री की हत्या पुलिस के सामने ही कर दी गई ! बाद में पुलिस की मिलीभगत की पराकाष्ठा उस समय नजर आई जब वहां पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने दूबे के खिलाफ अदालत में बयान देने से भी मना कर दिया ! इसी प्रकार माफिया जहरीली शराब का कारोबार चलाता है ! जिसमें 2019 में बहुत से उत्तर प्रदेश के लोग इस शराब को पी कर मर गए ! इस शराब माफिया का नेटवर्क पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 4 जिलों के अतिरिक्त उत्तरांचल के सीमावर्ती जिलों तक फैला हुआ था ! तो क्या इस प्रकार का नेटवर्क उस क्षेत्र की पुलिस और आबकारी विभाग के संरक्षण के बगैर चल सकता है ! उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार में भी माफिया की सरगर्मी सैयद शहाबुद्दीन तथा अन्य अपराधियों के द्वारा देखी जा सकती हैं ! बिहार के मुजफ्फरपुर में कुछ समय पहले पूरे देश ने देखा कि किस प्रकार वहां के महिला आश्रय गृह में निराश्रित महिलाओं का शारीरिक शोषण वहां के समाज कल्याण विभाग की आंखों के सामने होता रहा और इस आश्रय गृह का संचालक राजनीतिक संरक्षण के कारण आराम से इस शर्मनाक अपराध को करता रहा !
 
छोटे-छोटे अपराध अक्सर मनुष्य आवेश में या परिस्थिति बस करता है ! जिसकी सजा उसे देश की कानून व्यवस्था फौरन देती है ! देखने में आया है की देश की जेलों में ऐसे विचाराधीन कैदी ज्यादा है जो कानून की मदद लेने में असहाय है इस कारण उन्हें न्याय नहीं मिलता और बिना ट्रायल के ही यह लंबी अभी तक जेलो में बंद रहते हैं ! उधर संगठित अपराध करने वाले कानून को इस प्रकार घुमाते हैं की उन तक कानून का हाथ पहुंच ही नहीं पाता और यदि मीडिया की सक्रियता से कानून की गिरफ्त में आ भी जाते हैं तो हमारी कानून व्यवस्था की खामियों के कारण यह बच जाते हैं ! अपराधिक मामलों में प्रदेश की पुलिस अदालत में पीड़ित पक्ष का प्रतिनिधित्व करती है परंतु संगठित अपराधियों के द्वारा किए गए अपराधों में राजनीतिक संरक्षण के कारण राज्य पुलिस अपना दायित्व पूरी तरह से नहीं निभाती है ! इसका जीता जाता उदाहरण है मुख्तार अंसारी जो इसी प्रकार के संरक्षण के कारण लंबे समय से पंजाब की जेलों में आराम कर रहा है, और उत्तर प्रदेश में उसके विरुद्ध आपराधिक मामलों की सुनवाई लंबित है ! आखिर में उत्तर प्रदेश सरकार को उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा तब जाकर अंसारी को उत्तर प्रदेश मैं ट्रायल के लिए लाया जा रहा है ! इसी प्रकार जिस प्रकार सचिन बाजे जैसे अपराधी को महाराष्ट्र सरकार ने 15 साल के बाद दोबारा सेवा में रखा उससे एक आम नागरिक का मनोबल और देश के कानून पर विश्वास प्रभावित होता है !
अक्सर टीवी चैनलों पर बहस होती है की देशवासियों में राष्ट्रीयता की भावना को किस प्रकार जागृत किया जाए ! मगर इन बहसों में ज्यादातर राष्ट्रीयता की भावना के लिए जरूरी मुद्दों जो राष्ट्रीयता की भावना के लिए सबसे जरूरी है उन पर ध्यान नहीं दिया जाता है ! उपरोक्त अपराधों की स्थिति पर जब कोई वक्ता बोलता है तो संबंधित प्रदेश के सत्ताधारी दल का वक्ता उसकी बात को काट देता है ! जबकि होना चाहिए की निष्पक्ष रूप में नागरिक तथा समाज की सुरक्षा को मजबूत और पारदर्शी बनाने के उपाय सुझ!ना ! देश के कानून के द्वारा हर नागरिक को सुरक्षा और समान अवसर प्रदान किए जाने चाहिए !
 
इस प्रकार के वातावरण में ही एक नागरिक अपने देश की व्यवस्था पर गर्व महसूस करेगा और उसकी राष्ट्रीयता की भावना और भी मजबूत होगी ! इस प्रकार की स्थिति में देश में आर्थिक विकास भी होगा तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की प्रतिष्ठा भी बढ़ेगी ! 19वीं शताब्दी में पूरे विश्व में प्रजातांत्रिक क्रांति हुई और सामंत साईं के बाद में ज्यादातर देशों में प्रजातांत्रिक व्यवस्था कायम हुई ! परंतु गरीब और अविकसित देशों में सत्ता के लालच में दोबारा से बदले हुए रूप में गुलामी और सामंती व्यवस्था लागू कर दी ! इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं भारत पाकिस्तान और इसी प्रकार के कुछ अफ्रीकी और मध्य एशिया के देश ! पाकिस्तान में वहां की सेना ने आजादी के बाद से ही पाकिस्तान पर अपनी हुकूमत कायम कर दी और वहां की जनता का आर्थिक शोषण किया जिसके कारण आज पाकिस्तान की स्थिति है ! इसी प्रकार भारतवर्ष में भी बिहार उत्तर प्रदेश महाराष्ट्र पंजाब में अक्सर वोटों की राजनीति और बाहुबलियों के द्वारा प्रजातांत्रिक व्यवस्था को तोड़ा मरोड़ा गया जिसके उदाहरण ऊपर देखे गए हैं ! देश की व्यवस्था को इस स्थिति में पहुंचाने में अंग्रेजो के द्वारा लागू पुलिस एक्ट 1861 तथा कानून की आईपीसी और सीआरपीसी को उसी उसी रूप में स्वीकार किया जाना भी है ! मौजूदा पुलिस एक्ट तथा कानून की किताबों को अंग्रेजों ने एक गुलाम देश पर शासन करने के लिए बनाया था ना की एक स्वतंत्र और प्रजातांत्रिक देश के लिए ! उनके स्वयं के देश में पुलिस और आपराधिक कानून हमारे देश के कानूनों से बहुत भिन्न है ! इसलिए अब समय आ गया है जब कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति में देश के आधारभूत ढांचे पुलिस और न्याय व्यवस्था मैं समय और तकनीक के अनुसार सुधार किए जाएं जिससे पारदर्शी और शीघ्रता से एक देशवासी को न्याय मिल सके !देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा है कि देश को पुराने कानूनों से नहीं चलाया जा सकता है ! हमारे देश के प्रसिद्ध दार्शनिक चाणक्य ने भी न्याय को मनुष्य की सबसे जरूरी आवश्यकता बताया है !
 
अमेरिका और पश्चिमी देशों मैं उच्च कोटि की राष्ट्रीयता की भावना का मूल कारण है कि वहां पर कानूनकी नजर में सब नागरिकों का समान होना ! अमेरिका में वहां के राष्ट्रपति क्लिंटन तक को कानून के सामने नतमस्तक होना पड़ा था ! इसी प्रकार इटली के प्रधानमंत्री को 5 साल की सजा भुगतनी पड़ी ! इन देशों में अनेक उदाहरण हैं जिसमें कानून की दृष्टि में सबके साथ समान व्यवहार किया गया !यदि यह स्थिति हमारे देश में भी हो जाती है तो फिर हमारा देश सच्चे रूप में एक विकसित राष्ट्र कहलाया जाएगा !
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