अन्याय के प्रकार

NewsBharati    16-Jan-2026 10:16:46 AM   
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नैतिकता के अनुसार न्याय को करने वाला जितना दोषी होता है उतना ही उसी अन्याय को मुकदर्सक बनकर देखने वाला भी होता है ! महाभारत युद्ध के बाद भगवान कृष्ण जब वापस द्वारिका पहुंचे तो महारानी रुक्मणी ने उनसे पूछा कि युद्ध में भीष्म पितामह और गुरु द्रोणाचार्य को आपने क्यों मरवाया तो भगवान ने उत्तर दिया कि दोनों भी उतने ही उसे पाप के जिम्मेदार थे जितना की द्रौपदी का चीर हरण करने के लिए दुशासन था !

injustice

जिस सभा में चीर हरण हो रहा था उसी सभा में यह दोनों भी मौजूद थे और ये सभा के बरिस्टम की श्रेणी में थे ! इसलिए यदि इस कृतय को यह रोकने का प्रयास करते तो दूस!शन को रोका जा सकता था परंतु ये दोनों मुकदरसक दर्शक बनकर देखते रहे ! जिसका परिणाम महाभारत के रूप में महाविनास के रूप में सामने आया ! इसी प्रकार आज केj समाज में चारों तरफ अन्याय होता रहता है परंतु समाज के वरिष्ठ जिन्हें इसके विरुद्ध आवाज उठानी चाहिए वे मूक दर्शक बनकर इसे अपनी मौन सहमति देते रहते हैं !

जो अन्याय मानवता के विरुद्ध किया जाता है उसके परिणाम स्वरुप समाज का विनाश होता है और युग पर्वतन होता है ईसी प्रकार कलयुग का आगमन हुआ ! आज के युग में मनुष्य अपने स्वार्थ के लिए अन्याय पूर्ण कर्म कर्ता है परंतु इसको रोकने वाले शासन के कर्मचारी इनको को मुक दशक बनकरदेखते रहते हैं !जिसका परिणाम होता है समाज में तरह-तरह की बुराइयांऔर समाज का बिघटन और इसी का परिणाम है कि समाज विरोधी अपराधी खुलेआम घूमते हैं और जनता पर तरह के ! अत्याचार करते हैं जिससे द्रोपदी की तरह जनता अपने आप को असुरक्षित महसूस करती है !

शास्त्रों के अनुसार युग परिवर्तन उस युग के मनुष्यों पर ही निर्भर करता है ! पूरे समाज की जिस तरह की सोच और कर्म होते हैं उसी के अनुसार वह युग बुलाया जाता है ! सतयुग में चारों तरफ मानवता के कल्याण के कार्य किए जाते थे इसलिए उस समय समाज का हर व्यक्ति सुरक्षित महसूस करता था औरअपने विकास के लिए प्रयास करता रहता था ! इसके बाद त्रेता युग में कर्मों में बदलाव आयाऔर इस प्रकार बदलाव आते-आते कलयुग मेंचारों तरफअनैतिक और अन्यायपूर्ड कर्म चारों तरफ देखे जा सकते हैं ! यह केवल इसलिए हुआ है क्योकि इस युग में मनुष्य अपनी ज्ञानेंद्रिय द्वारा संसार का अनुभव करके उसका अपनी इंद्रियों द्वारा भोग करना चाहता है ! इसके लिए वह अनैतिक कर्म भी करता है जिनमे पाप कर्म भी होते है ! जिन व्यक्तियों को समाज के लिए प्रेरणादायक होना चाहिए वह ही इस युग में ज्यादा पाप और अनैतिक कम कर रहे हैं ! जिनके कारण पूरा समाज इनको देख kar इन्हीं कर्मों में लिप्त हो गया है ! इसलिए इसको कलयुग बुलाया जाता है !

उपरोक्त वर्णनन सेयह साफ हो जाता है की कर्मों के द्वारा ही युग का निर्माण होता है इसलिए यदि हमें दोबारा सतयुग में प्रवेश करना हैतो हमें अपने आसपास सत्कर्मों को महत्व देना होगाजिसके द्वारा हमारे द्वारा सतयुग की स्थापना हो सके !

Shivdhan Singh

Service - Appointed as a commissioned officer in the Indian Army in 1971 and retired as a Colonel in 2008! Participated in the Sri Lankan and Kargil War. After retirement, he was appointed by Delhi High Court at the post of Special Metropolis Magistrate Class One till the age of 65 years. This post does not pay any remuneration and is considered as social service!

Independent journalism - Due to the influence of nationalist ideology from the time of college education, special attention was paid to national security! Hence after retirement, he started writing independent articles in Hindi press from 2010 in which the main focus is on national security of the country.