विश्व की महाशक्तियों की विस्तारवादी नीतियों के कारण समाप्ति के कगार पर संयुक्त राष्ट्र संघ

NewsBharati    11-Feb-2026 12:05:01 PM   
Total Views |
विश्व की महाशक्तिअमेरिका ने लैटिन अमेरिका के वेनेजुएला पर हमला करके उसके राष्ट्रपति को इस प्रकार उठवा लिया जैसे एक अपराधी को पुलिस उठा के ले जाती है ! इसी प्रकारअमेरिकाअब डेनमार्कके दीप ग्रीनलैंडऔर कनाडा और कूयबा इत्यादि देशों पर अपनेअधिकार जता रहा है ! इसी प्रकार रूस ने 2014 में यूक्रेन के क्रिमिया पर हमला करकेउस पर कब्जा कर लिया थाऔर अब पिछले 4 साल से चले आ रहे युद्ध को समाप्ति के लिए उसने यूक्रेन के डॉनवास पर पर अपना अधिकार जता रहा है ! इस प्रकार देखा जा सकता हैकी विश्व की महाशक्तियां ही संयुक्त राष्ट्र संघ के दिशा निर्देशों का पालन नहीं कर रही है ! इस सब को देखकर चीन के राष्ट्रपति शीजिनपिंग ने अपने ब्रिटेन दौरे के समय कहा है किअंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करें विश्व की महाशक्तियां वरना विश्व में जंगल राज स्थापित हो जाएगा !


united nations


प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद लीगऑफ नेशन नाम की संस्था की स्थापना विश्व में शांति और सद- भावना स्थापित करने के लिए की गई थी ! परंतु इसके बावजूद दूसरा विश्व युद्ध शुरू हुआऔर लीगऑफनेशन समाप्त हो गई !इसी प्रकार दूसरे विश्वयुद्ध की समाप्त के बाद संयुक्तराष्ट्रसंघ की स्थापना की गई जिसका मुख्य उद्देश्यअंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति सुरक्षा तथा देशों के बीच विवादों को सुलझाकर अच्छे संबंध स्थापित करना है जिसके द्वारा देशों के बीच आर्थिक सामाजिक और सांस्कृतिक तालमेल को बढ़ाकर विश्व में सुख समृद्धि की वृद्धि करना है ! परंतु पिछले कुछ समय से विश्व में कई देशों में आपसी युद्धओ के कारण महाविनाश हो रहा है जो अभी तक जारी है और संयुक्तराष्ट्र संघ केवल मूकदर्शक बनकर इस महा विनाश को देख रही है !

इसराइल और हमास का युद्ध अक्टूबर 2023 में शुरू हुआ जो अभी तक जारी है इसके कारण गाज़ा की आवासीय इमारतें पूरी तरह तबाह और बर्बाद हो चुकी और वहां पर 61 मिलियन तन मलवा इकट्ठा हो गया है जिसके परिणाम स्वरूप वहां से 2.31 मिलियन फिलिस्तीनी विस्थापित हो गए हैं ! इसके साथ-साथ गाज़ा में 80% अस्पताल, कृषि की 86% जमीनऔर 83% जलस्रोत भी बर्बाद हो चुके हैं ! विशेषज्ञों के अनुसार गाज़ा में 18.5 बिलियन पाउंड के बराबर बर्बादी इस युद्ध के कारण हो चुकी हैऔर हरा भरा गाज़ा आज चारों तरफ उजाड़ और वीहड़ की तरह नजर आ रहा है ! इसी प्रकार पिछले 3 साल से रूस-यूक्रेन युद्ध चल रहा है जिसमें अब तक18 लाख सैनिक हताहत हो चुके हैं और युद्ध के द्वारा यूक्रेन में 30%आवासीय इमारतें, ऊर्जा के स्रोत जैसे विद्युत पावर स्टेशन इत्यादि पूरी तरह से बर्बाद हो चुके हैं ! और इसके साथ ही यूक्रेन में संचार के साधन जैसे सड़क, रेल व्यवस्था, समुद्री बंदरगाह, अस्पताल और स्कूल इत्यादि व्यवस्था ज्यादातर समाप्त हो गई है ! यहां पर भी1.5 बिलियन टन मालवा एकत्रित हो चुका है ! 1994 में रवांडा में जनसंहार हुआ तथा विश्व के अनेक देशों में मानवता के विरुद्ध घटनाये होती रहती है परंतु संयुक्त राष्ट्र संघ इस सब को मुर्दर्शक बनकर देखता रहता है !

1919 में ,प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद 1920 में विश्व में शांति, देशो के बीच में आपसी सहयोग और सुरक्षा, मानवता के कल्याण के लिए लीगऑफनेशन संस्था का गठन किया गया और इसका मुख्यालय जिनेवा में बनाया गया ! शुरू में सब ठीक-ठाक चल रहा था परंतु लीगऑफनेशन के असफल होने और समाप्त होने के मुख्य कारण थे कि इस संस्था के पास अपने निर्णयों को लागू करवाने के कोई साधन नहीं थे ! इसके साथ-साथ विश्व की महाशक्ति कहे जाने वाले देशों-, अमेरिका रूस इत्यादि इसके सदस्य बने ही नहीं और कुछ देश विश्व में अपनी डिक्टेटरशिप चलाने लगे जैसे अभी अमेरिका कर रहा है ! कुछ समय के बाद लीग ऑफ नेशन की कार्य प्रणाली देखकर जापान, जर्मनी और इटली ने लीग की सदस्यता ही छोड़ दी ! उस समय पूरे विश्व में या धारणा थी कि लीग ऑफ नेशन पर प्रथम विश्व युद्ध के विजेता देशों खासकर फ्रांस, इंग्लैंड इत्यादि का प्रभूत्व है और यह उन्हीं के इशारे पर निर्णय लेती है !

इसका प्रमाण था कि विजेता देश दूसरे देशों को शर्मिंदा और बेइज्जत कर रहे थे जैसे की प्रथम विश्व में के द्वारा जिन देशों मैं विनाश हुआ था उसकी भरपाई के लिए जर्मनी पर दबाव डाला जा रहा था ! जबकि वह स्वयं आर्थिक संकट से गुजर रहा था ! इसके कारण यूरोप के कुछ देशों में डिक्टेटरशिप की भावना जगने लगी थी इनमें इटली जापान और जर्मनी प्रमुख देश थे ! इसी के चलते जापान ने मंचूरियाऔर इटली ने एवीडीया पर कब्जा कर लिया था ! वरसेट!यल की संधि के अनुसार जर्मन पर कुछ प्रतिबंध लगे थे जिन्हें जर्मनी मानने के लिए तैयार नहीं था और धीरे-धीरे जर्मनी में हिटलर की तानाशाही स्थापित होने लगी ! इस सब के कारणजर्मनी नेअपनेपड़ोसी देशों पर हमले शुरू करके द्वितीय विश्व युद्ध कीशुरुआत कर दी जिसका अंत जापान के हीरोसीमा और नागासाकी के विनाश के साथ हुआ !

उपरोक्त वर्णन से साफ हो जाता है कि लीग ऑफ नेशन के समाप्त होने के प्रमुख कारण थे विश्व के प्रमुख देशों द्वारा इसकी सदस्यता ग्रहण नहीं करना और लीग की निष्क्रियता देखते हुए जापान, जर्मनी और इटली द्वारा इसकी सदस्यता को छोड़ देना ! इसके बाद जापान का मंचूरिया पर और इटली का इथोपिया पर कब्जा ! इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र संघ की तरफ ही अपने निर्णयों को लागू करवाने का कोई साधन लीग के पास नहीं था इसलिए धीरे धीरे जर्मनी इटली और जापान में तानाशाही जड़ जम!ने लगी जिसके कारण इन देशों के डिक्टेटर अपने साम्राज्य को विश्व के और देशों में बढ़ाना लगे जिसके लिए जर्मनी ने दूसरे विश्व युद्ध की शुरुआत कर दी !

इसके अतिरिक्त इंग्लैंड और फ्रांस जैसे सामंती प्रवृत्ति के देश विश्व के विभिन्न देशों में अपने साम्राज्य की सुरक्षा के लिए अमेरिका और रूस जैसे देशों की चाटुकार्यता तथा उनकी विस्तारवादी नीतियों की अनदेखी करके इन्हें बढ़ावा देने लगे ! महाशक्तियों की ऐसी प्रवृत्तियों को रोकने के लिए लीग में ना कोई प्रावधान था और ना ही उसके पास शक्ति थी ! आज के युग में यही सब विश्व की महा शक्तिअमेरिका और रूस कर रहे हैं !

आज के समय में विश्व मैं महाविनाश का अंदाजा इसी से लगाए जा सकता है कि द्वितीय विश्व युद्ध में जिस प्रकार जापान के हिरोशिमा और नागासाकी का संपूर्ण विनाश हुआ था उसी प्रकार का विनाश पूरे गाजा और यूक्रेन में हो चुका है ! आज गाज़ा में मानव जीवन के लिए कोई आधारभूत ढांचा नहीं बचा है ! इसी प्रकार यूक्रेन में भी इसी प्रकार की बर्बादी हो चुकी है ! बर्बादी के कारण इन देशों के नागरिक कई स्थानों से ज्यादातर पलायन करके पड़ोसी देशों में शरणार्थी के रूप में शरण लेने के लिए मजबूर हो गए हैं ! इसी क्रम में अमेरिका द्वितीय विश्व युद्ध से पहले के जर्मनी की तरह डिक्टेटरशिप के द्वारा अपने पड़ोसी देशों पर कब्जा कर रहा है ! उसने ड्रग्स तस्करी जैसे आरोप लगाकर वेनेजुएला के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी को उठा लिया है जिसकी कल्पना आज के प्रजातांत्रिक युग में नहीं की जा सकती है ! अमेरिका के राष्ट्रपति अपने आप को बेलंजुला का भी राष्ट्रपति बता रहे हैं ! असलियत में ट्रंप का वेनेजुएला में स्थित विश्व के सबसे बड़ा तेल भंडार को अपने नियंत्रण में लेना है ! इसके साथ ही ट्रंप अब क़ूयबा और कनाडा पर भी अपना अधिकार जमाना चाह रहे हैं !

इसी प्रकार अपनी विस्तारवादी नीति के कारण अमेरिका डेनमार्क के दीप ग्रीनलैंड पर अपना कब्जा करना चाह रहा है ! इस पर कब्जा करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहा है जिनके कारण नाटो के 8 देशों ने अपने सैनिक ग्रीनलैंड में एक्साइज के नाम पर भेज दिए हैं ! ईरान में प्रजातंत्र की बहाली के नाम पर उग्र धरने प्रदर्शन भी अमेरिका के शह पर किए जा रहे हैं जिनको अमेरिका का पूरा समर्थन है ! इसी कारण अमेरिका ने अपने एयरक्राफ्ट करियर जहाजों को ईरान पर हमले की तैयारी के लिए भेज कर ईरान को धमकी दे दी है ! उपरोक्त सैनिक युद्धों के साथ-साथ विश्व में परोक्ष युद्ध भी चल रहा है !परोक्ष युद्ध मीडियाऔरआतंकवाद के द्वारा लड़ा जाता है !

इस युद्ध के द्वारा दुश्मन देश की आंतरिक स्थिति को इतना बर्बाद करने की कोशिश की जाती है जिससे वह हमला करने वाले देश की सारी शर्तों को मान ले !और जो उद्देश्य सैनिक युद्ध से हासिल होते हैं वही इस युद्ध से हासिल करने की कोशिश की जाती है ! पिछले लंबे समय से पाकिस्तान भारत के विरुद्ध इसी प्रकार का परोक्ष युद्ध लड़कर भारत में सांप्रदायिक सद्भाव को खत्म करके देश के भीतरअशांति पैदा करना चाहता है जैसा कि पहलगांम में आतंकियों ने धर्म पूछ पूछ करके लोगों की हत्या की थी ! इसके अतिरिक्त दिल्ली के लालकिला जैसे धमाकों से वह देशवासियों में इतना भय पैदा करना चाहता है जिससे उनका विश्वास देश की व्यवस्था से उठ जाएऔर देश में सांप्रदायिक दंगों के द्वाराअशांति और अव्यवस्था फैल जाए जैसा की पाकिस्तान के बलूचिस्तान में चल रहा है ! अक्सर इस प्रकार का परोक्ष युद्ध सैनिक युद्ध में परिवर्तित हो जाता है जैसा की ऑपरेशन से सिदूर में हुआ था ! परंतु भारत के लगातार आवाज उठाने के बाद भी राष्ट्र संघ पाकिस्तान को रोकने के लिए कोई भी प्रतिबंध लगाने में अपने आप कोअसमर्थ पा रही है क्योंकि चीन और अमेरिका जैसे देश जिनके पास वीटो की पावर है वह इसको नहीं होने दे रहे हैं !

उपरोक्त स्थिति से समझा जा सकता है कि विश्व में इस समय वही हालात बन गए हैं जैसे की दूसरे विश्व युद्ध से पहले थे जिसके कारण लीगऑफनेशन कोसमाप्त कर दिया गया था ! इस स्थिति को देखते हुए बहुत से देश संयुक्त राष्ट्र संघ को उपरोक्त विनाश को रोकने में असमर्थ पाकर इसमें अपना विश्वास खो रहे हैं ! महा शक्तियांअपनी बीटो पावर का इस्तेमाल करके राष्ट्रसंघ कोअपनी निर्धारित जिम्मेदारी निभाने में असमर्थ बना रही हैं ! इस सब को देखते हुए राष्ट्रसंघ में महाशक्तियों की वीटोपावर पर पुनः विचार किया जाना चाहिए और उसमें इस तरह के परिवर्तन करने चाहिए जिससे कि वह अपनी शक्तियों का दुरुपयोग ना कर सकें ! इसके अलावा राष्ट्रसंघ के नियमों में ऐसे प्रावधान किए जाने चाहिए जिससे राष्ट्र संघ आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंधों के द्वारा उसके नियम कानून का उल्लंघन करने वाले देश के खिलाफ कार्रवाई करके उसका विश्व स्तर पर6 बहिष्कार कर सके ! और जिन देशों में मानवता के विरुद्धकोई भी कार्रवाई हो रही हैउस पर भी लगाम लगाई जा सकेकी जा सके ! इसलिएअब समय आ गया है जब राष्ट्रसंघ के सारे सदस्य देशों को एकत्रित होकर इसकी स्थिति पर गंभीर विचार विमर्श करना चाहिएऔर इसकेप्रावधानों में इस प्रकार का परिवर्तन करना चाहिए जिससे कि यह एक प्रभावशाली संस्था बनाकर विश्व मेंशांति और खुशहाली स्थापित कर सके !


Shivdhan Singh

Service - Appointed as a commissioned officer in the Indian Army in 1971 and retired as a Colonel in 2008! Participated in the Sri Lankan and Kargil War. After retirement, he was appointed by Delhi High Court at the post of Special Metropolis Magistrate Class One till the age of 65 years. This post does not pay any remuneration and is considered as social service!

Independent journalism - Due to the influence of nationalist ideology from the time of college education, special attention was paid to national security! Hence after retirement, he started writing independent articles in Hindi press from 2010 in which the main focus is on national security of the country.