आज के युग की गांधारी

NewsBharati    15-Apr-2026 11:07:15 AM   
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महाभारत काल में युद्ध में हुए महाविनाश के लिए कौरवों को जिम्मेदार ठहराया जाता है ! इस पर विचार करने पर यह ज्ञात होता है कि कौरवों का और खासकर दुर्योधन का व्यक्तित्व नकारात्मक कैसे बना तो इसका मुख्य कारण है उनकी मां गांधारी का दिन- प्रतिदिन के जीवन में नकारात्मक व्यवहार जिसके कारण उनके परिवार में पलने वाले उनके पुत्रों का व्यक्तित्व बचपन से ही नकारात्मक बनना शुरू हो गया ! शादी के बादपहले रात्रि को हीजब उन्हें पता लगाकि उनके पतिजन्मांध हैतब उन्होंनेप्रैक्टिस शुरू प्रतिशोध के रूप में अपनी आंखों पर पट्टी बांधकरअंधापन अपना लिया था !


mahabharat gandhari

बचपन में बच्चों के व्यक्तित्व के निर्माण में परिवार की मुख्य स्तंभ मां की भूमिका अहम होती है क्योंकि बच्चों को बचपन में कदम-कदम पर मां अपना प्यार दुलार देकर उनके व्यक्तित्व को सकारात्मक बनती है ! परंतु अंधेपन के कारण गांधारी कौरवों को यह प्यार दुलार नहीं दे सकी और दिन- प्रतिदिन में कोरव अपनी मां को इस प्रकार दुखी और व्यथित देखकर बदले की भावना से बड़े हुए ! जिसके कारण उन्होंने अनैतिकता की सीमा लांघते हुए द्रोपदी का चीर हरण करवाया ! धृतराष्ट्र जन्म से ही अंधे थे इसको देखते हुए उनके विवाह में व्यवधान आ रहे थे ! इसको देखते हुए माता सत्यवती नेभीष्म पितामह को आदेश दिया कि वह धृतराष्ट्र का विवाह एक राजकुमारी से करवाये !

इसके लिए भीष्म पितामह ने अपने राज्य से दूरआज के अफगानिस्तान और समय के गंधार पर हमला करकेवहां के राजा कोअपनी राजकुमारी का विवाह धृतराष्ट्र से करने के लिए विवश किया ! दूरी होने के कारण गंधार के राजाऔर उनकी पुत्री गांधारी को धृतराष्ट्र के अंधेपन की कोई जानकारी नहीं थी ! विवाह के बाद धृतराष्ट्र के अंधेपन के प्रतिशोध के रूप में गांधारी ने अंधेपन को अपना लिया जो परिवार की मुख्य स्तंभ पत्नी का एक बहुत बड़ा नकारात्मक और बदले की भावना का कदम था ! इस नकारात्मक व्यवहार के कारण दुर्योधन बचपन से ही पांडवों से ईर्ष्याऔर बदले की भावना रखता था और इसी भावना के कारण उसने उन्हें बार-बार मारने की कोशिश की थी ! इसी बदले की भावना के परिणाम स्वरुप ही उसने पांडवों को जुए में हराकर द्रोपदी का भरी सभा में चीर हरण करवाया और पांडवों को 13 वर्ष का वनवास दे दिया !जिसका परिणाम महाभारत युद्ध के महाविनास के रूप में सामने आया !

आज के युग में भी पति- पत्नी में मतभेद होने के कारण घर की स्त्री गांधारी की तरह नकारात्मक व्यवहार अपना लेती है !इसके कारण ऐसे परिवारों में पलने वाले बच्चे बचपन से ही हीन भावना से ग्रस्त और कुंठा के कारण अपराधिक प्रवृत्ति के बन जाते हैं ! और इसी का परिणाम है कि आज के युग में चारों तरफ नकारात्मक तथा अपराधिक प्रवृत्ति के लोगबढ़ते जा रहे हैं ! इस प्रकार महाभारत की गांधारी की तरह आज की मां भी अनजाने में दुर्योधन और कौरव तैयार कर रही हैं जो समाज में अपराध करके चारों तरफतनाव पैदा करते हैं !

महाभारत की गांधारी के चरित्र से स्त्रियों को यह समझना चाहिए कि उनके नकारात्मक और बदले की भावना के व्यवहार से उनके बच्चों पर बुरा प्रभाव डाल रहा है ! इसी क्रम में स्त्रियों को यह समझना चाहिए की शिवाजी की माता जीजाबाई ने अपने दिन- प्रतिदिन के व्यवहार और शिक्षाओं से शिवाजी का व्यक्तित्व इतना विकसित कर दिया था ! इसको देखते हुए घर की स्त्रियों को जो परिवार में मां की भूमिका निभाती है उनको अपने व्यवहार को सकारात्मक रखना चाहिए जिससे उनकी संतानों का व्यक्तित्व वे सकारात्मक बना सके जिसके द्वारा उनकी संतान जीवन में सफलता पा सके
 
 
 
 

Shivdhan Singh

Service - Appointed as a commissioned officer in the Indian Army in 1971 and retired as a Colonel in 2008! Participated in the Sri Lankan and Kargil War. After retirement, he was appointed by Delhi High Court at the post of Special Metropolis Magistrate Class One till the age of 65 years. This post does not pay any remuneration and is considered as social service!

Independent journalism - Due to the influence of nationalist ideology from the time of college education, special attention was paid to national security! Hence after retirement, he started writing independent articles in Hindi press from 2010 in which the main focus is on national security of the country.