केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल विधेयक काअसली उद्देश्य

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल विधेयक काअसली उद्देश्य

NewsBharati    02-Apr-2026 12:35:45 PM   
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केंद्रीय रिजर्व पुलिस बलों (सीएपीएफ) मेंउच्च पदों पर भारतीय पुलिससेवा (आइपीएस) के अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति के द्वारा तैनाती के रूप में देश में नौकरशाही का प्रभुत्व देखा जा सकता है ! इससे इन बलों के कैड़र अफसरो को अपने करियर में तरक्की करने के मौका की कमी और हीन भावना महसूस होती है जिससे इससे इन बलों के अफसरो का मनोबल प्रभावित होता है ! आईपीएस अधिकारियों की नियुक्ति से इन बलों के सैनिकों के भी मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है क्योंकि वे अपने अधिकारियों को हीउच्च पदों पर देखना चाहते हैं जैसा की सेना में भी होता है !

Central Armed Police Forces Bill

इसको देखते हुए सीएपीफ अधिकारियों ने आईपीएस अधिकारियों की इन बलों में नियुक्ति को उच्चतम न्यायालय में 2025 चुनौती दी थी तथा मांग की थी कि इन बलों के कैडर अफसरों को ही उच्च पदों पर नियुक्त किया जाना चाहिए ! इस पर न्यायालय ने आदेश पारित किया था कि इन बलों के अधिकारियों को ग्रुप ए सेवा का दर्जा हर प्रकार से दिया जाना चाहिए जिससे वह इन बलो के उच्च पदों तक पहुंच सके ! और धीरे-धीरेसरकार को आईपीएस अधिकारियों की नियुक्ति को इन बलों में कम करते जाना चाहिए ! देश के नौकरशाओं को न्यायालय की यह समान अधिकार वाली बात पसंद नहीं आई और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को निरस्त करने के लिए योजना बनाई जिसमें केंद्रीय गृहमंत्री श्रीअमितशाह राजसभा में केंद्रीयसशस्त्र पुलिस बल सामान्यप्रशासन विधेयक 2026 पेश कर रहे हैं !

इस बिल का उद्देश्य सीएपीएफ के अधिकारियों की भर्ती प्रतिनियुक्ति और पदोन्नति को नियमित करना है ! इसके अनुसार आईजी स्तर पर 50% पद आईपीएस से भरे जाने का प्रस्ताव हैइसके अतिरिक्त विधेयक में महानिदेशकऔर एडीजी स्तर के 67 फ़ीसदी पद आईपीएस अधिकारियोंके द्वारा भरे जाने का अभी प्रस्ताव है ! इसके साथ ही इन बलों में विशेष महानिदेशक और महानिदेशक के सभी पद सिर्फ आईपीएसअधिकारियों की प्रतिनियुक्ति के माध्यम से ही भरे जाएंगे ! इस बिल की प्रस्तावना और उद्देश्य से साफ हो रहा है कि इस बिल का उद्देश्य उत्तम न्यायालय के 2025 के आदेश को निरस्त करना है ! इस बिल सेनौकरशाही की झलक साफ नजर आती है जिसमेंउच्च पदों परअपनी नियुक्ति के लिए सीएपीएफ केअधिकारियों की उन्नतिऔर उनकेअपने बल के प्रति समर्पण को नजरंदाजकरने का प्रयास गया है ! जबकि सरकार की तरफ से होना चाहिए कि सीएपीएफ के अफसरों को भीअपने कैरियर मेंउन्नति के पूरेअवसर दिए जाएं और उन्हें भी इन बालों के उच्च पदों पर नियुक्त किया जाना चाहिए !


सीएपीएफ वलों का मुख्य कार्य देश मेंआतंकवाद को नियंत्रित तथा अंतरराष्ट्रीय देश की सीमाओं की सुरक्षा ,चौकसी तथा पड़ोसी देशों से घुसपैठ को रोकना होता है ! इस प्रकार के इन बलों की कार्य प्रणाली इन बलों में कार्यरत अधिकारी ही बेहतर समझकर कर सकते हैं ! परंतु आईपीएस अधिकारियों को इस प्रकार की कार्य शैली का कोई तजुर्बा होता ही नहीं है तो वह इन बलों के उच्च पदों पर किस प्रकार बेहतर कार्य कर सकते है ! केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में सीआरपीएफ, सीमा सुरक्षा बल, भारत तिब्बत सीमा बलऔर केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल आते हैं ! इनमें सीआरपीएफ की स्थापना 1939और बीएसएफ की स्थापना 1965 में की गई जो सीएपीएफ के मुख्य अंग है ! इससे देखा जा सकता है कि इन बलों की स्थापना को काफी समय बीत चुका है जिससे ये साफ हो जाता है कि इतने समय में इन बलों की संरचना में काफी संपूर्णता आ चुकी होनी चाहिए और इनके अधिकारी वर्ग का भी पूर्ण विकास इतने समय में हो चुका होगा ! सेना में सैनिकों तथा अधिकारियों के विकास तथा बदलते समय के अनुसार नई टेक्नोलॉजी की ट्रेनिंग प्रदान करने के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है ! इस प्रकार भारतीय सेना के सैनिक और अधिकारी देश की सीमाओं पर हर प्रकार की चुनौतियों के लिए हर समय तैयार रहते हैंजिसका उदाहरणऑपरेशन से सिंदूर है !इस ऑपरेशन मेंभारत की सेनाओ मिसाइलऔर ड्रोन की सहायता सेपाकिस्तान में अपने टारगेट को हिट कियापरंतु पाकिस्तान का कोई भी मिसाइल और ड्रोनभारत मेंकोई नुकसान नहीं पहुंच पाया !यह एक उदाहरण है की सेना के अधिकारीऔर सैनिक सफलतापूर्वक अपनी जिम्मेदारियां को निभाते हुए देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं! सेना के अधिकारी और सैनिक स्वयं को एक परिवार का हिस्सा समझकरअपनी जिम्मेवारियों को निभाते हैं ! परंतु यह भावना सीएपीएफ के बलों में नजर नहीं आती है क्योंकि वहां पर केवल कुछ समय के लिये आईपीएस अधिकारी प्रतिनियुक्ति परआते हैं जिनकी कोई भावना इन बालों के प्रति नहीं होती है ! सीएपीएफ वालों मैं उच्च अधिकारियों और मध्यवर्ग के अधिकारी और सैनिकों के बीच में कोई तालमेल ना होने के कारणअक्सर शिकायत आती हैं कीभारत की सीमाओं से घुसपैठिए भारत में प्रवेश करते हैं और सीमाओं पर पड़ोसी देशों से अवैध सामान कीस्मगलिंग भी होती है ! जिसको सीमा सुरक्षा बल के सैनिक रोक नहीं पाते हैं ! इसी संदर्भ में देखा जा सकता है कि भारतीय सेना दुश्मन के आधुनिकतम हथियारों का अपने पुराने हथियारों से ही सामना करते हुए दुश्मन पर विजय प्राप्त करती है ! इसके उदाहरण है1965 और 1971 का भारत पाक युद्ध जिसमें पाकिस्तान की सेवा नेआधुनिकतम पेंटन टैंको के द्वारा भारत पर हमला किया परंतु भारतीय सेना इन आधुनिक टैं को भीअपनेपुराने हथियारों से ही परास्त कर दिया 965 में अमृतसर के पास असल उत्तर के युद्ध जिसमें पाकिस्तान के 21पैटन टैको को भारत के सैनिकों ने बर्बाद किया था ! यदि यहां पर भी बाहर के कैडर के अधिकारी होते तो सैनिकों का मनोबलइतना ऊंचा ना होताऔर ना ही वह ऐसे कारनामे कर पाते ! किसी भी फोर्स के सैनिकों के उच्च मनोबल के लिए उसके सैनिकों और अधिकारियों के बीच में तालमेल बहुत अच्छा होना चाहिए परंतु यह दुख के साथ कहना पड़ता है कि सीएपीएफ में उच्च अधिकारियों की बाहर से नियुक्ति के कारण यह तालमेल नजर नहीं आता है !
सीएपीएफ बलों मेंआईपीएस अधिकारियों की नियुक्ति के कारण इनके कमान स्तर सेना जैसा तालमेल नहीं होता है ! क्योंकि जिन परिस्थितियों और स्थान पर सीएपीएफ बलों की तैनाती होती है उनका आईपीएस अधिकारियों को कोई अनुभव नहीं होता है ! आईपीएस अधिकारियों की नियुक्ति इन बालों में वही नकारात्मक भावना उत्पन्न करती है जो गुलामी के समय अंग्रेज नौकरशाहों की नियुक्ति करती थी ! आईपीएस अधिकारियों की नियुक्ति के लिए केंद्र सरकार कहती है कि वह इन अधिकारियों की नियुक्ति इन बलों के साथ बेहतर तालमेल और नियंत्रण के लिए करती है ! परंतु यहां पर यह विचारणीय है की इन बलों के केडर अधिकारी भी भारतीय ही है और इनके द्वारा भी वही तालमेल और समन्वय स्थापित किया जा सकता है जो आईपीएस अधिकारीयों के द्वारा किया ज किया जाता है !
भारतीय संविधान की धारा 312 के अनुसार देश के सिविल प्रशासन को नियंत्रित और सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रावधान किए गए हैं !इसके अनुसार प्भारतीय प्रशासनिकसेवा तथा पुलिससेवा के अधिकारियों को हर स्थान पर सिविल प्रशासन में तैनात किए जाने का प्रावधान है ! इसलिये ये अधिकारी हर ऐसी जगह पर तैनात किए जाते हैं जहां सामान्य सिविल प्रशासन6 की आवश्यकता होती है ! परंतु उसमें कहीं पर भी है इन अधिकारियों को विशेष प्रकार के विभाग जैसे विज्ञान, स्वास्थ्य, वित्त तथा राष्ट्रीय सुरक्षा में कार्यरत सेना तथा सीएपीएफ बलो में भी तैनात किए जाने का प्रावधान नहीं है ! इस प्रकार जैसे सेना देश की सीमाओ की सुरक्षा करती है उसी प्रकार सीएपीएफ बाल भी देश की आंतरिक सुरक्षा को सुरक्षित कर रही है ! इसलिए सीएपीएफ वलों में सिविल प्रशासन के अधिकारियों और भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों की नियुक्ति नहीं की जानी चाहिए !
अधिकतर दूसरे विभाग के अधिकारियों की नियुक्ति किसी विभाग में विशेष योग्यता के आधार पर की जाती है जो उस विभाग के अधिकारियों में नहीं होती है ! परंतु सीएपीएफ के अधिकारियों की योग्यता उतनी ही होती है जितनी की आईपीएस अधिकारियों की होती है ! इसके अतिरिक्त सीएपीएफ अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया भी संघ लोक सेवा आयोग के द्वारा ही की जाती है ! इसलिए अन्य क्लास वन सेवाओं की तरह एन एफ यू प्रावधान के द्वारा सीएपीएफ के अधिकारियों के भी वेतन वृद्धि के प्रावधान है ! परंतु यह खेद का विषय है कि तब किस सोच के आधार पर सीएपीएफ काडर के अधिकारियों को इन बलों के उच्च पदों पर नियुक्त नहीं किया जाता है ! इसके अतिरिक्त एक सैनिक तभी गर्व से अपनी ड्यूटी करता है जब उसकी कमान उसी के अधिकारियों के हाथ में होती है अन्यथा अंग्रेजी सरकार के समय की तरह जिस प्रकार अंग्रेज अफसर देश के उच्च पदों पर आसीन होते थे औरउनके अधीन भारतीय कर्मचारी हीन भावना से ग्रस्त होकर केवल ड्यूटी निभाने के लिए बिना पूर्ण समर्पण के अपना काम करते थे इसी प्रकार इन बलों के सैनिक भी करने के लिए मजबूर होते हैं !
इसलिए सरकार को उच्चतम न्यायालय के 2025 वाले आदेश के अनुसारधीरे-धीरे आईपीस अधिकारियों की इन बालों में नियुक्ति को घटाकर उनके काडर अधिकारियों को उन पर नियुक्त करना चाहिए ! और यदि सरकार को उनके व्यक्तित्व के विकास में कुछ कमी लगती है तो उन्हें उनके विकास के लिए सेना की तरह व्यक्तित्व विकास के लिए जूनियर और सीनियर कमान कोर्स चलाने चाहिए ! जिससे इन बालों के अधिकारियों की व्यक्तित्व का विकास किया जा सके ! इससे इन बलों कीजवाबदारी बढ़ेगीऔर सरकारउनकी सीमाओं पर इनके कर्मियों की कमियों के बारे मेंउनके अधिकारियों सेजवाब मांग सकती है और इन्हें इनके कर्मियों की कमी के लिए जिम्मेदार ठहरा सकती है! इससे अक्सर सीमाओं से घुसपैठ की जो समस्या सामने आती है उस पर भी लगाम लग सकती है !अधिकारी वर्ग में इस प्रकार के बदलाव से इन बलों के सैनिक भी भारतीय सेना के सैनिकों की तरह गर्व सेअपनी ड्यूटी निभाएंगेऔर देशकी सुरक्षा करेंगे !

Shivdhan Singh

Service - Appointed as a commissioned officer in the Indian Army in 1971 and retired as a Colonel in 2008! Participated in the Sri Lankan and Kargil War. After retirement, he was appointed by Delhi High Court at the post of Special Metropolis Magistrate Class One till the age of 65 years. This post does not pay any remuneration and is considered as social service!

Independent journalism - Due to the influence of nationalist ideology from the time of college education, special attention was paid to national security! Hence after retirement, he started writing independent articles in Hindi press from 2010 in which the main focus is on national security of the country.